TheIntRendz

Home » personal (Page 4)

Category Archives: personal

ज्ञान यज्ञ की चिनगारियाँ विश्व को प्रज्ज्वलित करेंगी

आदर्श चर्चा कहने और सुनने को बहुत मिलती है। पर व्यवहार में उसके दर्शन 
भी नही होते। जो सोचा और किया जाता है वह निकृष्ट कोटी का होता है। वासना 
और तृष्णा के अतिरिक्त और कोर्इ आकांक्षा ही शेष नहीं रहे तो ऐसे मानव 
समाज को नर पशुओं का झुण्ड ही कहा जायेगा। इन परिसिथतियों मे व्यकित को 
असंतोष की आग मे जलते रहने और समाज को असंख्य विपतितयों एवं उलझनों में 
उलझे हुए सर्वनाश की और बढ़ चलने के दुष्परिणाम ही भुगतने पड़ सकते हैं। 
सो ही सर्वग्राही विभिषिकोओं में हम व्यकित और समाज को बुरी तरह 
ग्रस्त-संतप्त और विक्षुब्द्ध बना देख भी रहें हैं। 

नरक की आग मे जलते रहना हमें अस्वीकार है। मानवता को 
निकृष्टता के कलंक से कलंकित न रहने देंगे। पतन और विनाश हमारा लक्ष्य 
नही हो सकता। दुबर्ुद्धि और दुष्प्रवृतियों को सिंहासन पर विराजमान रहने 
देना सहन न करेंगे। अज्ञान ओर अविवेक की सत्ता शिरोधार्य किए रहना अब 
असâा है। हम इन परिसिथतियों को बदलेंगे, उन्हे बदलकर ही रहेंगे। 
शपथपूर्वक परिवर्तन के पथ पर हम चले हैंं और जब हम सामथ्र्य की एक बूँद 
भी शेष है तब तक चलते ही रहेंगे। अविवेक को पदच्युत करेंगे। जब तक विवेक 
को मूर्धन्य न बना लेंगे, तब तक चैन न लेंगे। उत्कृष्टता और आदर्शवादीता 
की प्रकाश किरणें हर अंत:करण पहुचा देंगे और वासना-तृष्णा के निकृष्ट 
दलदल से मानवीय चेतना को विमुक्त करके रहेंगे। मानव समाज को सदा के लिए 
दुर्भाग्यग्रस्थ नही रखा जा सकता,उसे महान आदर्शो के अनुरूप ढलने और 
बदलने के लिए बलपूर्वक धसीट मे चले चलेंगे। पाप और पतन का युग बदल जाना 
चाहिए, उसे बदलकर रहेंगे। इस धरती पर स्वर्ग का अवरतण और इसी मानव प्राणी 
में देवत्व का उदय हमें अभिष्ट है।इसके लिए भागीरथ तप करेंगे। इसी प्रकार 
महान शपथ और व्रत को ज्ञानयज्ञ के रूप में परिवर्तित किया गया है। अनीति 
और अनौचित्य के गलित कुष्ठ से विश्व मानव का शरीर विमुक्त करेंगे। 
ज्ञानयज्ञ की चिंगारियाँ विश्व के कोने-कोने में प्रज्ज्वलित होंगी। 
विचार क्रांति का ज्योतिर्मय प्रवाह जन-जन के मन को स्पर्श करेगा। पृ 18 

 

–Pandit Sriram Sharma Acharya