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message on mothers day
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी..(Mother and motherland are superior to the Heaven.) this was uttered by Lord Rama in Ramayana.Rama is said to have uttered this while addressing his younger brother Lakshman after their victory over the demon king Ravana. The entire sloka is said to be as follows.
अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
“Lakshmana, even this golden Lanka does not appeal to me, mother and motherland are greater than heaven.”
No one can ever be debt free from the debt of mother. No one. The 9 months of pain and care she takes to bring up a new life.Sacrificing everything for her child makes her stand always at top of any body else. Mother is another name of God.Every day is mothers day for every body in this world.
Some message written by Lekhram Bhaisahab on occasion of mothers day, i liked it so posting it here
!! ” मदर्स- डे ” अथवा ” मातृ- दिवस ” मनाने की आवश्यकता !!
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” मदर्स- डे ” अथवा ” मातृ- दिवस ” मनाने की आवश्यकता भारतीय संस्कृति में नहीं पड़ती क्योकि यहाँ तो धारणा है- जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी.. किन्तु फिर भी यदि यह दिवस मनाई जाये तो कोई हर्ज नहीं.. इसी बहाने ही सही हम चिंतन करें कि जो पहले एक बेटी, एक बहन, पत्नि, बहू और फिर माँ की भूमिका में जीवनभर की अपनी पूरी जिम्मेदारियों को खूबसूरती से निभाती है…हे ईश्वर ! मेरी संतान यशस्वी हो, चिरायु हो, सुसंस्कारी हो, सफल हो और वैभवशाली हो.. उसकी राहों में कभी कोई अवरोध न हो.. निष्कंटकहो, निर्मल उजली राहों में वह कभी रुके नहीं, थके नहीं, झुके नहीं और महत्वपूर्ण अवसरों को चूके नहीं..यह मंगलकामना करती है.. ‘माँ हमारे लिए हमेशा है और रहेगी उसके ‘होने’ का ही महान अर्थ है ..उनकी महानता व्यक्त करने में सारे आलेख और उपन्यास, कहानी और कविता व्यर्थ है क्योंकि माँ वर्णनों से परे है . जीवन भर उनकी स्मृतियों के बहुत छोटे-छोटे किंतु बहुत सारे मखमली ऋण, आभार, कृतज्ञता जैसे शब्दों से ही हम शांत कर सकते हैं.. हम स्वयं जिसका अंश हैं, उसका ऋण कैसे चुकाएँ …माँ एक अनुभूति, एक विश्वास, एक रिश्ता है. आज के दिन यही उचित है की नितांत अपना सा शब्द ” माँ ” की पवित्रता तथा उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानें..अपने जीवन में रिश्तों को बेवजह बाँटने वाले परिस्थितियों से दूर ही रहें और माँ के प्रति अपना सही उत्तरदायित्व निभाकर उसकी झोली खुशियों से भर दें..